Tuesday, 9 February 2016

आया मधुऋतु का त्योहार

खेत-खेत   में   सरसों  झूमेसर-सर  वहे  वयार,
मस्त पवन के संग-संग आया मधुऋतु का त्योहार।
धानी  रंग  से  रंगी धरा,
परिधान   वसन्ती  ओढ़े।
हर्षित  मन  ले लजवन्ती,
मुस्कान   वसन्ती   छोड़े।
चारों  ओर   वसन्ती  आभाहर्षित  हिया  हमार,
मस्त पवन के संग-संग आया मधुऋतु का त्योहार।
सूने-सूने  पतझड़  को  भी,
आज वसन्ती  प्यार मिला।
प्यासे-प्यासे  से नयनों को,
जीवन  का  आधार  मिला।
मस्त  गगन हैमस्त  पवन है, मस्ती  का अम्बार,
मस्त पवन के संग-संग आया मधुऋतु का त्योहार।
ऐसा   लगे  वसन्ती  रंग  से,
धरा की हल्दी आज चढ़ी हो।
ऋतुराज ब्याहने  आ पहुँचा,
जाने की जल्दी आज पड़ी हो।
और कोकिला  कूँक-कूँक  कर, गाये मंगल ज्योनार,
मस्त पवन के संग-संग आया मधुऋतु का त्योहार।
पीली चूनर ओढ़ धरा अब,
कर  सोलह  श्रृंगार  चली।
गाँव-गाँव  में  गोरी  नाचें,
बाग-बाग   में  कली-कली।
या फिर  नाचें  शेषनाग  पर, नटवर  कृष्ण  मुरार,
मस्त पवन के संग-संग आया मधुऋतु का त्योहार।
***
-आनन्द विश्वास

Monday, 4 January 2016

*मेरे पापा सबसे अच्छे*

बालकों में अच्छे संस्कार सिंचन
का
एक प्रयास
और...
"मेरे पापा सबसे अच्छे"
पुस्तक
में
बालोपयोगी
बाल-कविताओं
और
बाल-गीतों
का समावेश किया गया है।
इस संकलन में 25 बाल-कविताएँ हैं।
जिसे
उत्कर्ष प्रकाशन, मेरठ
से
प्रकाशित किया गया है।
इस पुस्तक की प्रस्तावना कुछ इस प्रकार है।
प्रस्तावना
कविता मन से निकलकर मन तक पहुँचती है और विशेषकर कोमल बाल-मन पर तो अपना विशेष प्रभाव छोड़ती ही है। अच्छी शिक्षात्मक ज्ञान-वर्धक बातों को और संस्कारों को कविताओं और गीतों के माध्यम से कोमल बाल-मन तक सहज रूप में पहुँचाया जा सकता है।
साथ ही, बालक सरल भाषा में लिखी गई गेय कविताओं और गीतों को आसानी से याद भी कर लेते हैं, वे उन्हें चलते-फिरते गुनगुनाते भी रहते हैं और उनका अपने दैनिक जीवन में अनुकरण भी करते हैं।
इस पुस्तक में कविताओं और गीतों के माध्यम से अच्छी-अच्छी जीवनोपयोगी और ज्ञान-वर्धक बातों को बच्चों के कोमल बाल-मन तक पहुँचाने का प्रयास किया गया है। साथ ही बच्चों के मन में अच्छे संस्कारों के सिंचन का प्रयास भी किया गया है।
"मेरे पापा सबसे अच्छे" कविता-संकलन में, मैंने अपनी ढ़ेर सारी सुन्दर-सुन्दर कविताओं में से बालोपयोगी, रोचक और मनभावन बाल-कविताओं को चुना है और ये ऐसी बाल-कविताएँ हैं जिन्हें बच्चे सहज में ही गुनगुना सकेंगे और उनका अनुकरण भी कर सकेंगे।
'एप्पल में गुण एक हजार' कविता में एप्पल का सेवन करने से होने वाले अनेकानेक लाभों का वर्णन किया गया है तो 'केला खाओ, हैल्थ बनाओ' कविता में केला खाने के महत्व को बताया गया है। 'फल खाओगे, बल पाओगे' में फलों के महत्व को बताया गया है या फिर 'काजू किशमिश और मखाने, शक्ति-पुंज हैं जाने माने।' के माध्यम से बालकों को सूखे-मेवे आदि खाने के लिए प्रेरित किया गया है।
आधुनिक परिवेश में स्वास्थ्य की दृष्टि से, इन सभी बातों का ज्ञान बच्चों को होना अत्यन्त आवश्यक भी हैं।
'चलो बुहारें अपने मन को' कविता, मन से घृणा और द्वेष को दूरकर, प्रेम और भाई-चारे का सन्देश देती है तो 'चलो करें जंगल में मंगल' बच्चों को प्रकृति के साथ दो पल बिताने और उसके साथ अपने मन की बातों को बतियाने की ललक पैदा करती है और उसके संरक्षण का सन्देश देती है।
  'बन सकते तुम अच्छे बच्चे' कविता में बच्चों के मन में अच्छे संस्कार-सिंचन का प्रयास है तो कहीं स्वच्छता और ध्यान-योग को जीवन में अपनाने की प्रेरणा है।
"मेरी गुड़िया छैल-छबीली", "मेरा गुड्डा मस्त कलन्दर" जैसी कविताएँ बाल-सुलभ क्रीड़ाओ की अनुभूति करातीं हैं तो "आओ चन्दा मामा आओ" और 'सूरज दादा कहाँ गए तुम' चाँद-सितारों के साथ आत्मीय सम्वादों से परिपूर्ण है। 'मेरे जन्म दिवस पर' कविता बच्चों के मन में पुस्तक पढ़ने की ललक जगाती है। 
इस पुस्तक की हर कविता सभी वर्ग के पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। बालकों के कोमल बाल-मन में अच्छे संस्कारों का सिंचन कर उन्हें एक नई दिशा देगी।
ऐसा मेरा विश्वास है, अस्तु। 
-आनन्द विश्वास
सी-85, ईस्ट एण्ड एपार्टमेंटस्
न्यू अशोक नगर मैट्रो स्टेशन के पास
मयूर विहार फेज़-1 (एक्टेंशन)
नई दिल्ली- 110 096
मोः 09898529244, 7042859040

Thursday, 31 December 2015

My Papa Is The Best

...Anand Vishvas

My Papa is the best,
Become child with me.

They become instant horse,
And sit me on his back.

Shaking leg says Hin-Hin,
Valid wandered gallop.

And then they jump,
Say Tap-Tap, Tap-Tap.

Tired then say horse is hungry ,
Asking  for Bread and Pakora.

Bring tea and Pakora,
Now horse Delete appetite.

My beloved daughter, Queen,
Bring water to the thirsty horse.

I quickly get water,
And feed them by my own.

How beautiful doll brought,
Gift has swarmed.

When I press doll's stomach,
She sings song and laughs.

They dangle me on his feet,
Sing song Zhu-Zhu, Ma-Mu.

Pose, pose, taking the strain,
When high and drop on the bad.

Papa then filtered Pick
Pick up and Drop me.

Fall molt pleasing me,
Dad playing with bearable.

I take food with him,
They tell story every day.

I'm rolling and tossing,
When I tired I fall sleep.

...Anand Vishvas


Thursday, 17 December 2015

किस नम्बर की कार तुम्हारी

चन्दा   मामा    हमें   बताओ,
किस नम्बर की कार तुम्हारी।
पन्द्रह-पन्द्रह   दिन  ना  आते,
कैसी   है   सरकार   तुम्हारी।

पन्द्रह  दिन  तक इवन नम्बर,
पन्द्रह  दिन  तक  नम्बर ऑड,
इवन-ऑड  वहाँ   भी  चलता,
या  तुम   करते  रहते  फ्रॉड।

डीज़ल  से   क्या  चलते  तारे,
सीएनजी  किट नहीं वहाँ पर।
दूषित  है  वातास  वहाँ  क्या,
धूल-धुआँ  कैसा   है  ऊपर।

सूरज पर  क्या  पावर-कट है,
पावर-हाउस  हुआ क्या फेल।
लो-बोल्टेज की धूप  यहाँ  है,
राम    भरोसे   अपनी   रेल।

कौन-कौन  से  दल  हैं  नभ में,
भ्रष्टाचार   वहाँ    पर   कैसा।
अच्छे  दिन  हैं  कहो  वहाँ पर,
या फिर सब कुछ धरती जैसा।

कृष्ण-पक्ष  है,  शुक्ल-पक्ष  है,
पन्द्रह-पन्द्रह दिन का शासन।
क्या विपक्ष की संख्या कम है,
ठग-बन्धन का चलता शासन।

हमने   तो  सोचा  था  पहले,
मामा  के   घर  हम   जाऐंगे।
वातावरण  वहाँ जब  दूषित,
अब  हम वहाँ  नहीं  आऐंगे।

...आनन्द विश्वास

Monday, 30 November 2015

चलो बुहारें अपने मन को

चलो  बुहारें  अपने  मन  को,
और सँवारें  निज  जीवन को।
चलो  स्वच्छता को अपना  लें,
मन को निर्मल स्वच्छ बना लें।

देखो,  कितना गन्दा मन  है,
कितना कचरा और घुटन है।
मन  कचरे से अटा पड़ा है,
बदबू  वाला  और सड़ा  है।

घृणा  द्वेष  अम्बार यहाँ  है,
कचरा  फैला यहाँ  वहाँ है।
मन की सारी गलियाँ देखो,
गंध  मारती नलियाँ  देखो।

घायल  मन  की  आहें देखो,
कुछ  बनने  की  चाहें  देखो।
राग  द्वेष  के  बीहड़  जंगल,
जातिवाद के अनगिन दंगल।

फन  फैलाए   काले  विषधर,
सृष्टि निगल जाने  को तत्पर।
मेरे   मन   में,  तेरे   मन  में,
सारे जग के हर इक मन में।

शब्द-वाण से आहत  मन में,
कहीं  बिलखते बेवश मन में।
ढाई  आखर  को   भरना  है,
काम कठिन है पर करना है।
-आनन्द विश्वास

Thursday, 19 November 2015

हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई

हिन्दू  मुस्लिम  सिख  इसाई,
ये सब  क्या है,  बोलो  भाई।
उसने  तो   इन्सान   बनाया,
किसने  ऐसी   चाल  चलाई।

हिन्दू क्या है, मुस्लिम क्या है,
किसने   खोदी   ऐसी   खाई।
सबको मिल जुलकर रहना था,
फिर किसने  नफ़रत  फैलाई।

एक धरा  है  एक  गगन  है,
एक   खुदा  के बन्दे,  भाई।
एक  मनुज है, एक खून है,
सारे    इन्सां   भाई - भाई।

खून,  नसों में  बहता  अच्छा,
किसने   खूनी - नदी  बहाई।
हरे  रंग  की   सुन्दर  धरती,
क्यों कर इसको लाल रंगाई।

जगह-जगह  सन्नाटा  पसरा,
किसने भय-मय हवा चलाई।
प्रेम  रंग  है   सबसे  अच्छा, 
प्रेम   रंग   में  रंगो  खुदाई।
***
-आनन्द विश्वास

Monday, 16 November 2015

गाँधी जी के बन्दर तीन

गाँधी  जी  के  बन्दर  तीन,
तीनों   बन्दर  बड़े  प्रवीन।
खुश हो बोला पहला बन्दा,
ना मैं  गूँगा, बहरा, अन्धा।

पर  मैं  अच्छा  ही  देखूँगा,
मन को  गन्दा नहीं करूँगा।
तभी उछल कर दूजा बोला,
उसने राज़ स्वयं का खोला।

अच्छी-अच्छी  बात सुनूँगा,
गन्दा  मन  ना  होने  दूँगा।
सुनो, सुनाऊँ  मन की आज,
ये  बापू  के  मन  का  राज़।

जो   देखोगे    और   सुनोगे,
वैसे  ही  तुम  सभी  बनोगे।
हमको  अच्छा  ही बनना है,
मन को अच्छा ही रखना है।

अच्छा  दर्शन, अच्छा जीवन,
सुन्दरता से भर लो तन-मन।
सोच समझकर तीजा बोला,
मन में जो था, वो ही बोला।

आँख कान से मनुज गृहणकर,
ज्ञान संजोता  मन के अन्दर।
मुख से, जो भी मन में होता,
वो ही तो, वह बोला करता।

अच्छा बोलो जब भी बोलो,
शब्द-शब्द को पहले तोलो।
मधुर  बचन  सबको भाते हैं,
सबके   प्यारे   हो  जाते  हैं।
-आनन्द विश्वास