Wednesday, 26 February 2025

“अगर पेड़ पैसों के होते”

अगर  पेड़  पैसों  के  होते,

घर-घर पेड़ लगे तब होते।

तेरे,  मेरे,  सबके  घर  में,

पैसे   रोज़  टपकते  होते।

फिर कोई ना निर्धन होता,

पैसे  सभी   संजोते  होते।

डालर, यूरो, येन कहीं तो,

कहीं पाँच-सौ वाले होते।

पेड़ों का सब रक्षण करते,

कहीं पेड़ ना कटते  होते।

शुद्ध-वायु ना दुर्लभ होती,

कोविड जैसे रोग ना होते।

हरी-भरी धरती होती तो,

नहीं फेफड़े  जर्जर  होते।

पाँच-तत्व पैसों से बढ़कर,

काश बात हम समझे होते।

पशु-पक्षी हर्षित मन होते,

चारों ओर  चहकते होते।

पेड़ लगाओ,धरा बचाओ,

शुद्ध  वायु  पैसे  ही  होते।

-आनन्द विश्वास, दिल्ली