Tuesday, 14 July 2015

मेरी गुड़िया छैल-छबीली

मेरी गुड़िया छैल-छबीली
...आनन्द विश्वास
मेरी    गुड़िया   छैल-छबीली,
जींस  पहनती   गहरी  नीली।
इलू-इलू   बोले  वह   सबको,
प्यार  बाँटती  सारे  जग को।

काला  चश्मा   लाल  रुमाल,
और   सुनहरे   सुन्दर   बाल।
जैकिट  है  फर  वाला  लाल,
शूज़  पहन  कर  करे कमाल।

आँखें   उसकी    नीली-नीली,
और   टॉप  है   हल्की  पीली।
कभी  खोलती   आँखें  अपनी,
और  कभी  ढक  लेती  ढपनी।

मटक-मटक कर आँख दिखाती,
और   कभी   आँखें   मटकाती।
ठुमक-ठुमक कर नाँच दिखाती,
सबके  मन को  बड़ा  लुभाती।

जब  मैं  उसका  पेट  दबाती,
सुन्दर-सुन्दर   गाने    गाती।
मुझको  प्यारी  मेरी  गुड़िया,
मैं  पापा  की  प्यारी गुड़िया।

गुड़िया मुझको प्यारी लगती,
मै  पापा  को  प्यारी लगती।
प्यारा-प्यारा जग  से न्यारा,
सुखमय  है   संसार  हमारा।
...आनन्द विश्वास
चित्र गूगल से साभार

6 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 16 - 07 - 2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2038 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  2. सच में बहुत प्यारी लगी गुड़िया |

    ReplyDelete
  3. बहुत ही बेहतरीन पेशकश !!

    ReplyDelete
  4. प्यारी कविता.

    ReplyDelete